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मंथन

अचानक ही गायब हो गए कजाखस्तान से हिरण

कजाखस्तान में कुछ ऐसा हुआ कि यहां पाए जाने वाले करीब 90 फीसदी साइगा हिरणों की अचानक ही मौत हो गयी. अब पर्यावरण संरक्षक यह पता लगाने में जुटे हैं कि ऐसा क्यों हुआ.

कजाखस्तान का संरक्षित इलाका मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुल इलाके जितना बड़ा है. साइगा हिरणों को यहां खोजना घास के ढेर में सूई खोजने जैसा है. यहां कभी साइगा की सबसे ज्यादा आबादी रहती थी. लेकिन कुछ ही दिनों के अंदर 90 प्रतिशत की मौत हो गई. प्रसव के दौरान एक के बाद एक मादा हिरण की मौत होती गई, करीब 2,00,000 की. अब यहां सिर्फ 33,000 साइगा हिरण ही बचे हैं.

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जगह जगह फैले हैं साइगा हिरणों के कंकाल

रिसर्चरों को पता चला है कि पास्टॉयरेला नाम का बैक्टीरिया हिरणों की मौत के लिए जिम्मेदार है. रिसर्चरों को यह भी पता है कि हिरणों की मौत से पहले तापमान में भारी गिरावट आई थी. रॉयल वेटेनरी कॉलेज, लंदन के रिचर्ड कॉक बताते हैं कि जानवर अत्यंत तनाव में थे, "उनकी सर्दी की खाल अभी गिरी ही थी. सर्दी से कोई सुरक्षा नहीं थी. और शरीर पर बैक्टीरिया के हमले के साथ मिलकर इससे महामारी फैल गई." नतीजा, महज पांच घंटे या हद से हद बारह घंटे में मौत.

साइगा हिरणों में बड़े पैमाने पर मौत की घटना पहले भी अक्सर हुई है लेकिन उसका आयाम इतना व्यापकत कभी नहीं रहा. सभी संक्रमित जानवरों की मौत क्यों हो गई और महामारी अलग अलग जगहों पर कैसे फैली, इन सवालों के जवाब अब भी नहीं मिल पाए हैं. मुश्किल इलाका, शिकारियों का हमला और बड़े पैमाने पर महामारी से मौत. कजाखस्तान के इन जानवरों ने हजारों सालों के दौरान सब कुछ देखा है और झेला है. लेकिन पर्यावरण संरक्षकों को डर है कि साइगा एक और महामारी नहीं झेल पाएंगे.

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