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खेल

अगले वर्ल्ड कप से रेफरी नियमों में बदलाव

फीफा वर्ल्ड कप 2010 के दौरान कुछ गलत फैसलों और विवादित चालों की वजह से नतीजों में भारी उलटफेर हो गया. इसके बाद फीफा ने अगले वर्ल्ड कप के लिए रेफरी के नए नियम तय करने का मन बना लिया है. इसमें गोललाइन तकनीक भी शामिल है.

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ब्राजील में 2014 विश्व कप

अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल की गवर्निंग बॉडी के महासचिव जेरोम फाल्के ने कहा, "मैं यह कह सकता हूं कि मौजूदा नियमों के साथ खेला जा रहा यह आखिरी वर्ल्ड कप है." फीफा आम तौर पर परंपरागत नियमों में बदलाव करने के खिलाफ रहा है लेकिन इस बार के वर्ल्ड कप में कुछ हैरान कर देने वाले नतीजे आए.

Süd Afrika WM 2010 FIFA Schiedsrichter Koman Coulibaly

मेक्सिको के खिलाफ मैच में अर्जेंटीना के टेवेज साफ तौर पर ऑफ साइड थे. उन्होंने गोल किया और उसे मान लिया गया. इसी तरह जर्मनी और इंग्लैंड के बीच हुए मुकाबले में फ्रैंक लैम्पार्ड के गोल को नहीं माना गया, जबकि गेंद गोललाइन पार कर चुकी थी. टेवेज के गोल के बाद स्टेडियम में बड़े पर्दों पर इस गोल के रीप्ले को दिखाया गया और मेक्सिको के खिलाड़ियों ने भी इसे देखा. उन्होंने इसका विरोध भी किया. पर फुटबॉल में रेफरी का नतीजा नहीं बदलता है.

फाल्के का कहना है कि लैम्पार्ड के गोल को नहीं दिया जाना फीफा के लिए एक बुरे दिन जैसा था. उन्होंने कहा, "हम एक ऐसे गोल की बात कर रहे हैं, जिसे रेफरी नहीं देख पाया और इसीलिए नियमों में बदलाव की बात कर रहे हैं." उन्होंने कहा कि हमें देखना होगा कि क्या नए नियमों से कुछ बेहतरी किया जा सकता है.

कुछ दिनों पहले गोललाइन पर दो और लाइन्समैन तैनात करने का प्रयोग शुरू हुआ और यूरोप के कुछ मुकाबलों में उन्हें आजमाया गया. वे पेनाल्टी एरिया पर भी नजर रखते हैं. यह प्रयोग सफल साबित हो रहा है. यूरोप 2012 क्वालीफायर में इसे अमल में लाया जाएगा. अगला वर्ल्ड कप 2014 में ब्राजील में खेला जाना है.

फीफा के अध्यक्ष सेप ब्लाटर ने भी गोल की गलतियों पर माफी मांगी है और कहा है कि यह सही नहीं है कि ऐसी त्रुटियों को सुधारा न जाए. उरुग्वे और घाना के मैच के दौरान उरुग्वे के एक खिलाड़ी ने गोलपोस्ट के अंदर बिलकुल हाथ से गेंद रोक दी, जिसकी वजह से उसे रेड कार्ड और घाना को पेनाल्टी शूट मिला. एक तय गोल की जगह पेनाल्टी से घाना के खिलाड़ी गोल नहीं कर पाए और मुकाबला पेनाल्टी शूट आउट में चला गया, जहां उरुग्वे की जीत हुई.

फाल्के का कहना है कि अब फुटबॉल का खेल बहुत तेज हो चुका है और रेफरी आम तौर पर खिलाड़ियों से ज्यादा उम्र के होते हैं. वे उस तरह नहीं भाग सकते, जैसे खिलाड़ी भागते हैं. इसके अलावा एक रेफरी को ही पूरी ग्राउंड पर नजर रखनी होती है, तो उनसे चूक भी हो जाती है.

फीफा की अगले महीने बैठक होनी है. तब तो इस मसले पर गंभीरता से चर्चा नहीं होगी लेकिन अक्तूबर में होने वाली बैठक में इस पर कोई फैसला किया जा सकता है.

रिपोर्टः रॉयटर्स/ए जमाल

संपादनः एम गोपालकृष्णन

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