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दुनिया

अगर निर्दोष हैं तो साक्ष्य पेश करें: दिल्ली पुलिस कमिश्नर

उमर खालिद ने जेएनयू को संबोधित कर कहा है कि गलत ​मीडिया ट्रायल ने उनके बारे में अफवाह फैलाई है. उधर दिल्ली पुलिस कमिश्नर ​बीएस बस्सी ने छात्रों से बेगुनाही के सबूत मांगते हुए कहा है कि पुलिस किसी के साथ अन्याय नहीं करती.

जेएनयू मामले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने कहा है ​कि आरोपी छात्रों को उनकी बेगुनाही के सबूत देने होंगे. बस्सी ने कहा, ''अगर वे निर्दोष हैं तो उन्हें इसका साक्ष्य पेश करना चाहिए.'' दूसरी तरफ सवालों में घिर रही दिल्ली पुलिस का बचाव करते हुए बस्सी ने कहा, ''​हमारा मानना है कि न्याय की पहली सी​ढ़ी पुलिस है और हम किसी के साथ भी अन्याय वाला कार्य नहीं करते हैं और ना ही कभी करेंगे.''

उधर दूसरी तरफ जेएनयूएसयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी के बाद से फरार बताए जा रहे छात्रों ने रविवार की रात जेएनयू एड ब्लॉक के सामने एक सभा को संबोधित किया. 9 फरवरी को जेएनयू में अफजल गुरू पर आयोजित एक कार्यक्रम में लगे कथित देशविरोधी नारों के चलते इन ​छात्रों पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया है. जेएनयू छात्रसंघ का कहना है कि ये छात्र सरेंडर नहीं करेंगे और पुलिस चाहे तो उन्हें गिरफ्तार कर सकती है.

रविवार की रात हुई इस सभा को संबोधित करते हुए मुख्य आरोपी बताए जा रहे पीएचडी के छात्र उमर खालिद ने कुछ मीडिया चैनलों पर उनके बारे में गलत जानकारी प्रचारित करने के आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि आईबी और सरकार की तरफ से उनके जैश ए मोहम्मद के साथ कोई संबंध न होने की बात स्वीकार लेने के बाद भी कोई मीडिया इस गलत जानकारी को फैलाने के लिए माफी नहीं मांग रहा है.

मीडिया ने बताया कि मैं मुसलमान हूं

उन्होंने कहा, ''मैंने पिछले 7 सालों से इस कैंपस में राजनीति करते हुए अपने आप को कभी एक मुसलमान की तरह न सोचा है और ना ही पेश किया है... लेकिन पहली बार पिछले 10 दिनों में मीडिया ने बताया कि मैं मुसलमान हूं.''

इसी बीच जेएनयू मामले में कथित तौर पर ​गैरजिम्मेदार तरीके से रिपोर्टिंग करने के चलते हिंदी के एक प्रतिनिधि चैनल 'जीन्यूज' के प्राड्यूसर विश्व दीपक ने इस्तीफा दे दिया है.

उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा है, ''कन्हैया समेत जेएनयू के कई छात्रों को हमने लोगों की नजर में ‘देशद्रोही' बना दिया. अगर कल को इनमें से किसी की हत्या हो जाती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? हमने सिर्फ किसी की हत्या और कुछ परिवारों को बरबाद करने की स्थिति पैदा नहीं की है, बल्कि दंगा फैलाने और गृहयुद्ध की नौबत तैयार कर दी है. कौन सा देशप्रेम है ये? आखिर कौन सी पत्रकारिता है ये?''

उधर दूसरी तरफ जेएनयू अध्यक्ष की गिरफ्तारी के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शनों के बीच रविवार को इंडिया गेट के पास हजारों लोग एक और प्रदर्शन के लिए जुटे. ये लोग जेएनयू में देशद्रोह के कथित नारों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग कर रहे थे.

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