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खेल

अकेले कितना ढोएंगे मेसी, रोनाल्डो

लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो जबरदस्त प्रतिभा के धनी हैं लेकिन दोनों पर शाप है कि उनकी टीमें ऐसी नहीं हैं, जो उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ा सकें. सवाल है कि अकेले वे अपनी टीमों को कितना ढो पाएंगे.

यह अलग बात है कि 1986 के वर्ल्ड कप अर्जेंटीना ने सिर्फ डिएगो माराडोना की बदौलत ही जीता था. लेकिन आलोचकों का मानना है कि 28 साल पहले की टीम अभी से तो बेहतर ही थी. दूसरी तरफ पुर्तगाल के गोल्डन ब्वाय रोनाल्डो का उदय पुर्तगाल के गोल्डन एज के खात्मे के बाद हुआ. नतीजा वही है कि वह भी मेसी की तरह अकेले ही टीम का बोझ ढोते रहते हैं.

अर्जेंटीना के कोच अलेयांद्रो जाबेला से पूछा गया कि जब स्विट्जरलैंड के खिलाफ मैच में तीन खिलाड़ी अकेले मेसी को घेरे हुए थे, तो दूसरे खिलाड़ियों ने इसका फायदा क्यों नहीं उठाया. कोच ने इस सवाल का जवाब घुमा फिरा कर दिया. अर्जेंटीना के खिलाफ खेल रही टीम स्विट्जरलैंड, मेसी पर तीन खिलाड़ियों को लगा देने का हिम्मत रख सकती थी क्योंकि बाकी की अर्जेंटीना टीम बहुत कमजोर है.

WM 2014 Achtelfinale Argentinien - Schweiz

मुकाबले में बने हुए हैं मेसी

कोच को इस बात का अफसोस है कि टीम में आर्यन रोबेन या फ्रांक रिबेरी जैसा कोई चेहरा नहीं है, जो विपक्षी खेमे को रक्षा पंक्ति पर बांध कर रख दे. टीम में इजेक्वेल लावाजी हैं, लेकिन उन पर बहुत भरोसा नहीं किया जा सकता. यहां तक कि उन्हें दूसरे हाफ में बाहर ही बुला लिया गया. एंगेल डी मारिया टीम में जरूर हैं लेकिन उन्हें मिडफील्ड में भी खेलना पड़ता है.

पुर्तगाल के लिए भी ज्यादा विकल्प नहीं हैं और इस वजह से उन्हें भी रोनाल्डो पर ही भरोसा रहता है. रोनाल्डो ने वर्ल्ड कप क्वालिफायर में स्वीडन के खिलाफ चार गोल किए थे. इसके बगैर उनकी टीम वर्ल्ड कप तक पहुंच भी नहीं पाती. लेकिन ब्राजील में रोनाल्डो पूरी तरह फिट नहीं थे और इसकी वजह से उनकी टीम को खामियाजा भुगतना पड़ा.

हालांकि मेसी की टीम अभी भी बनी हुई है. अगर 28 साल बाद टीम को खिताब जीतने का करिश्मा करना है तो उसके लिए टीम को मेसी पर ही आश्रित रहना होगा.

एजेए/एएम (डीपीए)

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