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विज्ञान

अंतरिक्ष में भारत अमेरिका जोड़ीदार

भारत और अमेरिका अंतरिक्ष में मानव भेजने और अन्य अभियानों में साझीदार हो सकते हैं. भारतीय प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच इस तरह की बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है. यह अंतरिक्ष अनुसंधान में मददगार साबित होगा.

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चंद्रयान के साथ भी नासा ने उपकरण भेजे थे

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बीच हुई बातचीत के बाद एक साझा बयान जारी किया गया. इस बयान में कहा गया है कि अगले साल तक सिविल स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप दोबारा गठित किया जाएगा.

साझा बयान में कहा गया, "अंतरिक्ष विज्ञान, वैज्ञानिक ज्ञान और मानव कल्याण में दोनों देशों के सहयोग की अपार संभावनाएं हैं. ओबामा और मनमोहन सिंह ने वैज्ञानिकों से यह भी कहा कि वे

Obama in Indien

कृषि, मौसम के पूर्वानुमानों, नौवहन, मानचित्रण और शोध के लिए नए कदम उठाएं और योग्यता बढ़ाने के लिए काम करें.

दोनों नेताओं ने मॉनसून के पूर्वानुमान के लिए बनाए गए नए प्रबंध का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इसके जरिए किसानों को 2011 के मॉनसून से ही ज्यादा सटीक और बेहतर पूर्वानुमान मिलने लगेंगे. यह कदम भारत और अमेरिका के बीच वैज्ञानिक सहयोग की एक मिसाल है जिसके जरिए आर्थिक, कृषि और खाद्य सुरक्षा का विकास होगा.

भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष विज्ञान में सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण हाल ही में भारत द्वारा चांद पर भेजा गया चंद्रयान-1 मिशन है. 2008 के अक्तूबर में भेजे गए भारत के इस पहले चंद्र अभियान में नासा के पेलोड्स को भी ले जाया गया. दोनों देशों की एजेंसियों ने मिलकर शोध भी किए. भारत दो साल के भीतर एक और चंद्र अभियान की तैयारी कर रहा है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) आने वाले पांच साल में मंगल पर अपना मिशन भेजने की भी तैयारी में लगा है.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः एमजी

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