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दुनिया

अंटार्कटिक में फंसा जहाज

रूस का एक जहाज दक्षिणी ध्रुव के पास अंटार्कटिक की बर्फ में फंस गया है. चालक दल को बचाने के लिए चीन का एक जहाज वहां भेजा जा रहा है. आस पास का पानी जम कर बर्फ बन चुका है.

ऑस्ट्रेलियाई नौसैनिक सुरक्षा प्राधिकरण एमसा इस बचाव काम में समन्वय कर रहा है. उसका कहना है कि एमवी अकाडेमिक शोकाल्सकी के बचाव के लिए जा रहे जहाज को तेज हवाओं और सख्त बर्फ का सामना करना पड़ रहा है. 74 यात्रियों के साथ यह जहाज फ्रांसीसी ठिकाने डुमों डीउर्विल से कोई 100 नॉटिकल मील की दूरी पर मंगलवार से फंसा है.

कुल तीन जहाजों से बचाव के लिए मदद मांगी गई है, जिसमें चीनी जहाज स्नो ड्रैगन सबसे करीब यानी करीब 15 नॉटिकल मील की दूरी पर पहुंच चुका है. इसके अलावा फ्रांसीसी जहाज लाएस्त्रालोब 20 नॉटिकल मील पर और ऑस्ट्रेलियाई जहाज ऑरोरा ऑस्ट्रालिस भी पास पहुंच चुका है. एमसा का कहना है, "शुक्रवार को मौसम बेहतर हुआ है. अगले दो दिन तक मौसम ठीक रहने का अनुमान है."

Antarktis - MV Akademik Shokalskiy

जहाज से देखने पर हर तरफ बर्फ ही बर्फ

फंसे हुए जहाज में सवार क्रिस फोगविल का कहना है कि उनका जहाज उस इलाके में है, जहां आम तौर पर पानी जमता नहीं, बहता रहता है. लेकिन मौसम में हुए अचानक बदलाव की वजह से वे फंस गए हैं. फिर वहां बर्फ की आंधी चलने लगी, "गुरुवार को तो पूरे दिन ही बर्फ की आंधी चलती रही. लेकिन अब हवा धीमी हो रही है."

जहाज पर खाने पीने का पर्याप्त सामान है और फोगविल का कहना है कि कप्तान बीच बीच में जहाज के इंजन को चला रहा है, ताकि यह बर्फ में जाम न हो जाए. फोगविल ने कहा, "हम क्रिसमस के एक शाम पहले ही यहां फंस गए. इस तरह हमें बर्फ में थमा हुआ क्रिसमस मनाना पड़ा. लेकिन यह काम विज्ञान से जुड़ा है, लिहाजा कोई हर्ज नहीं."

न्यूजीलैंड से 28 नवंबर को चले इस जहाज पर वे वैज्ञानिक और सैलानी सवार हैं, जो एक सदी पहले डगलस मॉसन के रास्ते पर दोबारा चल रहे हैं. मॉसन ऑस्ट्रेलिया के एक खोजी नाविक थे. जहाज पर सवार दल उन्हीं वैज्ञानिक प्रयोगों को दोहरा रहा है, जिसे मॉसन ने 1911-14 के बीच किया था. यह ऑस्ट्रेलियाई अंटार्कटिक खोज अभियान का पहला बड़ा अभियान था.

टीम का कहना है कि यहां से निकलने के बाद वे एक बार फिर अपने अभियान को आगे बढ़ाएंगे.

एजेए/एमजे (एएफपी, एपी)

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