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नगालैंड पर हावी कोरियाई संस्कृति

२७ नवम्बर २०१०

भारत के पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड और कोरिया में कौन सी चीज एक जैसी है. इस सवाल का जवाब है, कुछ भी नहीं. लेकिन नगालैंड पहुंच कर कतई ऐसा नहीं लगता. नगालैंड के किसी भी शहर में पहुंचने पर किसी कोरियाई शहर का आभास होता है.

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तस्वीर: picture alliance / dpa

बीते कोई छह दशक से उग्रवाद के लिए सुर्खियों में रहे नगालैंड में तेजी से कोरियाई संस्कृति हावी हो रही है. राजधानी कोहिमा के ज्यादातर घरों में अब किसी भी भारतीय चैनल के मुकाबले कोरियाई चैनल ज्यादा देखे जाते हैं. यही नहीं, बाजारों में भी कोरियाई फिल्मों की सीडी और डीवीडी की सबसे ज्यादा मांग है. नगालैंड के लगभग हर घर में इन फिल्मों की डीवीडी मिल जाएगी. राज्य में कोरियाई फिल्मों के पोस्टर भी नजर आते हैं. कोरियाई फिल्मों ने लोकप्रियता के मामले में यहां हॉलीवुड को भी छोड़ दिया है.

Wurst aus Hundefleisch
तस्वीर: AP

भारत और कोरिया के बीच नए व्यापार समझौते के बाद इस पर्वतीय राज्य में कोरियाई संस्कृति तेजी से हावी हो रही है, खासकर नगा युवकों में. अब कोरियाई कंपनियां भी इस राज्य में निवेश के प्रति दिलचस्पी ले रही हैं.कोहिमा में एक छात्रा अरेनी कहती हैं, "मुझे कोरियाई फिल्में बेहद पसंद हैं."

तेजी से हावी होती संस्कृति ने स्थानीय नगा संस्कृति और परंपराओं के लिए खतरा पैदा कर दिया है. लेकिन आखिर इसकी वजह क्या है ? राज्य के सबसे बड़े संगठन नगा होहो के एक पदाधिकारी खोनबेमा कहते हैं, "विदेशी संस्कृति के बढ़ते असर की वजह से हमारी अपनी संस्कृति खतरे में पड़ गई है. युवाओं में यह तेजी से लोकप्रिय हो रही है. लोग गरीबी के बावजूद विदेशी संस्कृति की नकल करते हुए महंगी जीवनशैली अपनाने लगे हैं. इससे हमारी पहचान खत्म होने का खतरा है. विदेशी संस्कृति अपनाने की वजह से युवा वर्ग नगा संस्कृति को भूलता जा रहा है. पारंपरिक पहनावे की जगह विदेशी कपड़ों ने ले ली है."

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि नगा लोगों में भारत सरकार के प्रति भारी नाराजगी है. वह लोग खुद को भारतीय ही नहीं मानते. ज्यादातर सरकारी योजनाएं नगालैंड के दूरदराज इलाकों तक नहीं पहुंचती. ज्यादातर लोगों के पास राशन कार्ड तक नहीं हैं. नतीजतन केंद्र और राज्य के लोगों के बीच दूरियां लगातार बढ़ रही हैं. नगालैंड में 16 जनजातियां रहती हैं. इन सबकी भाषा तो अलग है ही, इनकी सांस्कृतिक विरासत भी धनी है. लेकिन युवकों में कोरियाई संस्कृति के प्रति बढ़ते लगाव के चलते अब इन पर खतरा मंडराने लगा है. राज्य सरकार ने भी कोरियाई संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में पहल करते हुए सालाना भारतीय कोरियाई सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन शुरू किया है.

छात्र कोरियाई फैशन भी अपनाने लगे हैं. नगालैंड के दूसरे शहर ऊखा के एक छात्र जोनाह कहते हैं, "मुझे कोरियाई फिल्में अच्छी लगती हैं. इन फिल्मों को देखने के बाद ही मैंने कोरियाई संस्कृति अपनाई. मैंने इन फिल्मों के जरिए अभिनय सीखा और कोरियाई फैशन के कपड़े पहनने लगा हूं. यह लाजवाब है."

लेकिन राज्य के लोगों को लगता है कि नगा संस्कृति कोरियाई संस्कृति के आगे दबने लगी है और इसके खत्म होने का खतरा पैदा हो गया है. खोनबेमा कहते हैं, "नगालैंड में 16 अलग अलग जनजातियां हैं. इन सबकी सांस्कृतिक विरासत काफी धनी है. सरकार या दूसरे संगठन भी युवकों में विदेशी स्संकृति अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने की दिशा में कोई कदम नहीं उठा रहे हैं. दशकों से जारी उग्रवाद ने युवकों को मुख्यधारा से अलग कर दिया है. यही वजह है कि वे आसानी से मिलने वाले कोरियाई सामानों के और फैशन के प्रति तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. अगर यह सब ऐसे ही चलता रहा तो जल्दी ही हमारी संस्कृति और पोशाक खतरे में पड़ जाएगी. हमारी विरासत खतरे में नजर आ रही है."

ऊखा से कुछ दूर खेतों में काम करने वाली चेनमोंगी अपने इकलौते बेटे के रहन सहन में आए बदलाव से परेशान है. चेनमोंगी कहती है, "वह अजीब फैशन के कपड़े पहनता है और न जाने किस भाषा की फिल्मों की सीडी देखता रहता है. इसके लिए वह अकसर मुझसे पैसे मांगता है. मैं काफी परेशान हूं. उसका रंग ढंग ठीक नहीं लगता. लेकिन मैं क्या कर सकती हूं. उसके बाकी दोस्त भी वैसे ही हैं."

बुजुर्गों में बढ़ती इस चिंता के बावजूद राज्य के युवक-युवतियों में कोरियाई संस्कृति के प्रति दीवानगी लगातार बढ़ती जा रही है. लेकिन ऐसा क्यों? कालेज के छात्र जोना कहते हैं, "यह बेहद आधुनिक और कूल है."

रिपोर्टः प्रभाकर, कोहिमा (नगालैंड)

संपादनः ए जमाल

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