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ग्राउंड जीरो के पास बनेगी मस्जिद

४ अगस्त २०१०

न्यू यॉर्क शहर के एक आधिकारिक संगठन ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के पास मस्जिद बनाने की अनुमति दे दी है. लेकिन कई लोगों का मानना है कि 11 सितंबर 2001 के हमलों में मारे गए लोगों के लिए वहां मस्जिद का निर्माण अपमानजनक होगा.

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पास बनेगी मस्जिदतस्वीर: DW/AP/Bilderbox.de

न्यू यॉर्क के सिटी लैंड कमिशन ने ग्राउंड जीरो के पास एक पुरानी इमारत को ऐतिहासिक इमारत का दर्जा देने से मना कर दिया. यह इमारत अब सोहो प्रॉपर्टीज की संपत्ति है, जो इसकी जगह एक इस्लामिक सांस्कृतिक केंद्र बनाना चाहता है. आयोग के सदस्यों का मानना था कि 1857 में बनाई गई इमारत का कोई खास महत्व नहीं है और इसे खत्म कर यहां मस्जिद बनाई जा सकती है. आयोग के इस रवैये ने हादसे से प्रभावित लोगों के बीच विवाद खड़ा कर दिया है.

11. September Gedenken 2009
हादसे के शिकार की याद मेंतस्वीर: AP

मुस्लिम सेंटर और मस्जिद का विरोध करने वाले लोगों का मानना है कि इसके निर्माण से हादसे में मारे गए लोगों का अपमान होगा क्योंकि 11 सितंबर के हमले का जिम्मेदार अल कायदा था जो एक इस्लामी संगठन है. कमिशन के फैसले के मुताबिक अब ग्राउंड जीरो के पास 13 मंजिलों का एक मुस्लिम सांस्कृतिक परिसर बनेगा जिसमें इबादत के लिए एक खास कमरा और 500 लोगों को बिठाने की क्षमता वाला एक ऑडिटोरियम भी होगा. फैसले से नाखुश लोग इसके खिलाफ बुधवार को अदालत में एक शिकायत दर्ज करेंगे.

लेकिन सेप्टेंबर 11 फैमिलीज फॉर ए पीसफुल टुमॉरो संगठन के लोगों ने फैसले की सराहना की है. हादसे में मारे गए लोगों के परिजन इसके सदस्य हैं और इनके मुताबिक आयोग ने अपना फैसला बिना भावुक होकर और बिना किसी राजनीतिक दबाव में आकर किया है. संगठन ने एक बयान में कहा कि उसके सदस्य ग्राउंड जीरो के पास इस्लामी सांस्कृतिक सेंटर बनाने का समर्थन करते हैं क्योंकि इससे धर्मों के बीच सहनशीलता की भावना बढ़ेगी और यह शांति जैसे अन्य अमेरिकी मूल्यों को दर्शाता है.

सोहो प्रॉपर्टीज के मालिक शरीफ अल गमाल ने कमिशन के फैसले का स्वागत किया है. न्यू यॉर्क के मेयर माइकल ब्लूमबर्ग ने कहा है कि जमीन के मालिक अपनी मर्जी के मुताबिक मस्जिद भी बना सकते हैं. यहूदी, ईसाई और मुस्लिम धार्मिक नेताओं के साथ एक भाषण में उन्होंने कहा कि मस्जिद से शहर के लोग एक दूसरे के करीब आएंगे और इससे लोग इस्लाम को 2001 के हमलों से जोड़ना बंद करेंगे.

लेकिन अमेरिकन सेंटर फॉर लॉ एंड जस्टिस का मानना है कि शहर के प्रशासन ने उन अमेरिकी नागरिकों की बात को टाल दिया है जिन्हें नहीं लगता है कि यह जगह मस्जिद के लिए सही है. उन्होंने इमाम फैसल अब्दुल रऊफ के बयान का हवाला भी दिया जिसमें इमाम ने कहा है कि अमेरिकी सरकार की नीतियां एक तरह से सितंबर 2001 के हमलों में साझेदार थीं. अब्दुल रऊफ इस्लामी सेंटर प्रॉजेक्ट के प्रमुख हैं और अमेरिकी खुफिया एंजेसियों की मदद भी करते हैं. कुछ लोग अटकलें लगा रहे हैं कि सेंटर बनाने का पैसा आतंकवादी संगठनों से जुटाया जाएगा. लेकिन सोहो के शरीफ अल गमाल का कहना है कि मस्जिद का वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के पास होना एक संयोग है और मुस्लिम समुदाय की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस जमीन को खरीदा गया था.

रिपोर्टः एजेंसियां/एम गोपालकृष्णन

संपादनः आभा एम